DVD Full Form क्या होती है? DVD क्या होती है?

क्या आपको पता है की dvd की full form क्या होती है? क्या आपको पता है की dvd कैसे बनती है या यह काम कैसे करती है। अगर नहीं, तो इस आर्टिकल में आपको dvd के बारे में सारी जानकारी हिंदी में मिल जाएगी। शुरू से अंत तक पूरा पढ़े।

DVD तो आप सभी ने इस्तेमाल की होगी। आज से कई साल पहले जब पेनड्राइव नहीं हुआ करते थे तब सीडी और डीवीडी ही चलती थी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की यह dvd बनती कैसे है या यह काम कैसे करती है। अगर आपके दिमाग में भी ऐसे सवाल आए है तो आज आपको इसका जवाब मिल जाएगा।

इस आर्टिकल में आपको पता चलेगा की dvd की full form क्या होती है, dvd क्या होती है dvd कैसे काम करती है और इसके फायदे और नुक्सान क्या है इसके साथ आपको dvd की हिस्ट्री भी पता चलेगी।

DVD Full Form क्या होती है?

DVD की Full Form “Digital Versatile Disc” होती है पहले इसे Digital Video Disc कहते थे। यह एक ऑप्टिकल डिस्क स्टोरेज डिवाइस है। इसका मुख्य उपयोग डाटा को स्टोर करना है। यह डिजिटल रूप से डाटा को dvd में स्टोर करता है।

DVD क्या होती है?

डीवीडी एक Digital Versatile Disc होती है जिसमें डाटा को स्टोर किया जाता है और फिर डीवीडी प्लेयर की मदद से इस डाटा को पढ़ा जाता है यह ऑप्टिकल स्टोरेज डिवाइस होती है। डीवीडी को सीडी टेक्नोलॉजी में सुधार करके बनाया गया है। एक डीवीडी की क्षमता 4.7 GB से लेकर 17 GB तक की होती है। 

DVD कितने प्रकार की होती है?

DVD-ROM – इस तरह की डिस्क में केवल डाटा को पढ़ा जाता है यहाँ आप डाटा को लिख या मिटा नहीं सकते है।

DVD-R  DVD+R – यह ब्लैंक यानी खाली डिस्क होती है इसमें किसी भी तरह का कोई डाटा नहीं होता है यहाँ आप डाटा को केवल एक बार डाल सकते है। डीवीडी में डाटा burn करने के बाद यह डिस्क dvd-rom बन जाती है।

DVD+RW – यह एक रीराइटेबल डीवीडी होती है जैसे आप इसके नाम से ही समझ गए होंगे। इस डिस्क में आप बार बार डाटा को लिख सकते है और डिलीट भी कर सकते है। इसका इस्तेमाल आप बार बार कर सकते है। इसकी कीमत dvd+r से थोड़ी ज्यादा होती है।

DVD कैसे बनती है?

किसी भी सीडी या डीवीडी में तीन लेयर होती है। सबसे निचे प्लास्टिक बेस होता है उसके ऊपर reflective लेयर की पतली परत होती है और सबसे ऊपर रिकॉर्ड डाटा को नुक्सान से बचाने के लिए acrylic की coating होती है। किसी भी सीडी में डिजिटली डाटा स्टोर किया जाता है।

सबसे पहले म्यूजिक के साउंड को माप कर उसे नंबर में कन्वर्ट किया जाता है यानी की बाइनरी फॉर्मेट 0 और 1 में। इस प्रक्रिया को sampling कहते है। जब पूरा का पूरा डाटा बाइनरी फॉर्मेट में कन्वर्ट हो जाता है फिर डीवीडी में लेजर बीम के द्वारा छोटे छोटे छेद किये जाते है। इसे सीडी burn करना कहते है।

सीडी burn होने के बाद उसमें जो छोटे छोटे छेद होते है वह 0 को दर्शाते है। इसे pits कहते है और सीडी में जिस जगह पर कोई छेद नहीं होता है वह 1 को दर्शाते है। इसे land कहते है। इसी तरह साउंड का जो डाटा बाइनरी फॉर्मेट में कन्वर्ट होता है उसे लेजर बीम के द्वारा सीडी में स्टोर किया जाता है।

DVD कैसे काम करती है?

अब आपको यह तो पता चल गया की सीडी में डाटा कैसे स्टोर किया जाता है अब बात करते है की यह सीडी में स्टोर डाटा आपके cd player या कंप्यूटर, लैपटॉप में चलता कैसे है।

जब आप सीडी को सीडी प्लेयर में लगा कर सीडी प्ले करते है तो सीडी प्लेयर में लगी मोटर शुरू हो जाती है जो सीडी को 500 राउंड पर मिनट घुमाती है इसी के साथ cd player में लगी लेजर बीम सीधे सीडी की चमकीली सतह से टकराती है।

जब यह लेजर बीम बिना burn किये सपाट जगह से टकराती है तो reflect हो कर फोटो सेल पर गिरती है। सीडी प्लेयर में लगा फोटो सेल एक electronic light detector होता है जो हर बार सीडी से लाइट रिफ्लेक्ट होने पर सीडी पर बनी सपाट जगह को पता करके करंट को एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में भेज कर 1 नंबर generate करता है।

इसी तरह से जब लेजर बीम सीडी के pits यानी छेड़ो पर पड़ती तो लाइट रिफ्लेक्ट नहीं होती है जिससे फोटो सेल कोई लाइट डिटेक्ट नहीं करता है और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट 0 नंबर generate करता है। इसी तरह सीडी में स्टोर डाटा जो 0 और 1 के फॉर्मेट में था इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का पहुँचता है।

इसके बाद digital to analog converter इस बाइनरी फॉर्मेट को decode करके इलेक्ट्रॉनिक करंट में बदल देता है उसके बाद यह इलेक्ट्रॉनिक करंट स्पीकर में जाकर साउंड में बदल जाता है जो की वही म्यूजिक होता है जिसे cd में स्टोर किया गया था।

DVD के फायदे क्या है?

  • डीवीडी का सबसे बड़ा फायदा इसकी कीमत है मार्किट में डीवीडी मात्र 15 से 20 रूपये में मिल जाती है। जबकि वही पेनड्राइव की कीमत इससे बहुत ज्यादा होती है।

DVD के नुक्सान क्या है?

  • डीवीडी में हम डाटा को पढ़ तो सकते है लेकिन इसमें हम न तो डाटा को add सकते है न delete कर सकते है और ना ही edit कर सकते है जो डाटा जैसे है हम उसे वैसे ही पढ़ सकते है।
  • डीवीडी एक बार burn करने के बाद उसमें दुबारा कुछ भी डाल नहीं सकते है।
  • डीवीडी में पेनड्राइव के मुकाबले काफी कम जगह होती है।
  • डीवीडी में अगर scratch लग जाए तो इससे डाटा खराब भी हो सकता है।
  • डीवीडी में डाटा पेनड्राइव के मुकाबले धीरे रीड होता है। पेनड्राइव में डाटा को पढ़ने की speed ज्यादा होती है।

DVD की History क्या है?

डीवीडी का आविष्कार सन 1995 में  Sony, Panasonic और Samsung के द्वारा किया गया था। डीवीडी से पहले ऑप्टिकल डिस्क पर वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए कई फॉर्मेट विकसित किए गए थे।

सन 1958 में डेविड पॉल ग्रेग और जेम्स रसेल द्वारा ऑप्टिकल रिकॉर्डिंग तकनीक का आविष्कार किया गया था और 1961 में पहली बार पेटेंट भी कराया गया था। एक उपभोक्ता ऑप्टिकल डिस्क डेटा फॉर्मेट जिसे लेजरडिस्क के रूप में जाना जाता है, संयुक्त राज्य में विकसित किया गया था और पहली बार 1978 में अटलांटा, जॉर्जिया में बाजार में आया था।

इसके बाद VCD यानी Video Compact Disc 1993 में इस फॉर्मेट में डिजिटल रूप से एन्कोडेड फिल्मों को बेचा गया। उसी वर्ष, दो नए ऑप्टिकल डिस्क स्टोरेज फॉर्मेट विकसित किए जा रहे थे।

एक MMCD यानी Multimedia Compact Disc थी, जिसे Philips और Sony समर्थन दे रहे थे, और दूसरी ओर SD यानी Super Density डिस्क थी, जिसे Toshiba, Time Warner, Matsushita Electric, Hitachi, Mitsubishi Electric, Pioneer, Thomson और JVC समर्थन दे रहे थे।

इसके बाद SD के प्रतिनिधि कंपनियों ने डिस्क के उपयोग करने के लिए फाइल सिस्टम पर आईबीएम से सलाह मांगी। और कंप्यूटर डाटा को स्टोर करने के लिए फॉर्मेट का समर्थन माँगा।

इसके बाद पांच कंप्यूटर कंपनियों IBM, Apple, Compaq, Hewlett-Packard, और Microsoft से एक समूह का गठन किया गया और प्रेस में कहा कि वे केवल एक फॉर्मेट को ही स्वीकार करेंगे। 

TWG यानी Technical Working Group ने दोनों फॉर्मेट का बहिष्कार करने के लिए मतदान किया जब तक कि दोनों प्रतिद्वंदी एक फॉर्मेट से सहमत नहीं हो जाते है।

दोनों गुटों के अधिकारियों पर दबाव डालने के लिए IBM के अध्यक्ष Lou Gerstner को भर्ती किया गया। इसके बाद कंप्यूटर कंपनियों की जीत हुई और एक एक फ़ॉर्मेट पर सहमति हुई। जिसे अब DVD कहा जाता है।

मुझे उम्मीद है की आपको DVD की Full Form और डीवीडी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर फिर भी आपका डीवीडी से सम्बंधित कोई सवाल हो तो आप हमे निचे कमेंट करके पूछ सकते है।

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